पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह को हाईकोर्ट से राहत, भाजपा नेता रसाल सिंह की चुनाव याचिका खारिज

उच्च न्यायालय ने कहा, केवल आरोपों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता है। जिन नियमों के तहत यह याचिका प्रस्तुत की गई है वह इस मामले में लागू नहीं होते हैं।

प्रदेश आज, ग्वालियर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह (Congress leader Dr. Govind Singh) को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर (Madhya Pradesh High Court Bench Gwalior) से बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने डॉ. गोविंद सिंह के चुनाव को चुनौती देते हुए भाजपा नेता रसाल सिंह (BJP Leader Rasal Singh) द्वारा प्रस्तुत चुनाव याचिका को खारिज (Election petition dismissed) कर दी है।

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न्यायमूर्ति आनंद पाठक (Justice Anand Pathak) ने रसाल सिंह की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है। चुनाव पवित्र उद्देश्य के लिए होते हैं। गलत आधार लोकतंत्र की भावना को प्रदूषित कर सकते हैं। केवल आरोपों के आधार पर ऐसे मामलों में निर्णय नहीं लिया जा सकता है। जिन नियमों के तहत यह याचिका प्रस्तुत की गई है वह इस मामले में लागू नहीं होते हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिका में जो मुद्दे उठाए गए हैं उनकी पुष्टि के लिए कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। बिना भौतिक तथ्यों के प्रस्तुत याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।

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लहार विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित घोषित डॉ. गोविंद सिंह निर्वाचन को चुनौती देते हुए उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी रसाल सिंह ने चुनाव याचिका प्रस्तुत की थी। चुनाव याचिका जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत प्रस्तुत करते हुए कहा गया था कि निर्वाचित घोषित डॉ. गोविंद सिंह ने चुनाव में गलत तरीकों का इस्तेमाल किया, इसलिए चुनाव को निरस्त घोषित कर फिर से चुनाव कराए जाएं। याचिका में यह भी निवेदन किया गया कि डॉ. गोविंद सिंह को छह साल के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।

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याचिका में कहा गया कि निर्वाचित विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने नामांकन भरते समय जो शपथ पत्र प्रस्तुत किया था। उसमें तथ्यों को छुपाया था। उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की जानकारी उसमें नहीं दी गई थी। याचिका में यह भी कहा गया कि डॉ. गोविंद सिंह ने अपनी संपत्ति का विवरण सही नहीं दिया। महत्वपूर्ण जानकारी छुपाई गई। इस प्रकार डॉ. गोविंद सिंह ने चुनाव में जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत गलत आचरण किया है, इसलिए उनके चुनाव को शून्य घोषित कर फिर से चुनाव कराए जाने का निवेदन किया गया।

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इस मामले में डॉ. गोविंद सिंह का कहना था कि उन्होंने चुनाव में लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम का कोई उल्लंघन नहीं किया है, इसलिए उनके चुनाव को चुनौती देते हुए जो याचिका प्रस्तुत की गई है उसे खारिज किया जाए। उनकी ओर से प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि उन्हें किसी भी मामले में न्यायालय द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है। उन्होंने जो जानकारी शपथ पत्र में दी थी वह सही है।

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1 Comment

  1. Since last few years it is observed that the candidate in election wins that’s all okay of loses then blame game starts, to opposite candidate, to party, to EVM, to EC, to officials etc. Now a days it’s in trend and fashion.

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