नामांतरण शुल्क की वसूली पर रोक से हाई कोर्ट का इनकार

नगरपालिका अधिनियम के तहत इस प्रकार के शुल्क को लगाने का अधिकार निगम के पास नहीं है। इसके बावजूद नगर निगम ने कर में वृद्धि कर उसकी वसूली शुरू कर दी है। नामांतरण शुल्क अब अलग से खाता खोलकर जमा किया जाएगा 

प्रदेश आज, ग्वालियर। नगर निगम द्वारा संपत्ति के नामांतरण शुल्क में वृद्धि किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने नामांतरण शुल्क की नई दर से वसूली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने नई दर से वसूले जाने वाले सुन को को अलग से खाता खोलकर उसमें जमा करने के आदेश दिए हैं।

उच्च न्यायालय ने इस मामले में नगर निगम के अधिवक्ता दीपक खोत को जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय दिया है। न्यायालय ने कहा कि निगम द्वारा की जाने वाली नामांतरण शुल्क की वसूली इस मामले में होने वाले फैसले के अधीन रहेगी। यह जनहित याचिका राम भरोसे शर्मा में एडवोकेट जेपी मिश्रा के माध्यम से प्रस्तुत की है जिसमें निगम द्वारा नामांतरण शुल्क ₹5000 किए जाने को नियम विरुद्ध बताते हुए उस पर तत्काल रोक लगाए जाने के दिशा निर्देश देने का निवेदन किया गया है। यहां शुरू का अखबार में विज्ञप्ति प्रकाशित करने के नाम पर लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि नगरपालिका अधिनियम के तहत इस प्रकार के शुल्क को लगाने का अधिकार निगम के पास नहीं है। इसके बावजूद नगर निगम ने कर में वृद्धि कर उसकी वसूली शुरू कर दी है।

नगर निगम ने सन 1991 में नामांतरण शुल्क लगाया था उस समय निगम के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर हाईकोर्ट में निगम के शुल्क वसूली के फैसले को निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम इस प्रकार शुल्क में वृद्धि नहीं कर सकता। इस मामले में नगर निगम की ओर से एडवोकेट दीपक खोत का कहना था कि हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद नगर निगम एक्ट में काफी बदलाव हो चुके हैं। इसकी जानकारी देने के लिए उन्हें समय दिया जाए इस पर न्यायालय ने उन्हें समय दे दिया।

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